मां का प्यार

ढूंढता है एक बच्चे अपनी मां को किसी पेड़ की छांव में
 किसी बड़े घरों में मजदूरी करती है उसकी मां
 खिलाती पिलाती है बड़ा करती है बहुत मेहनत से उसकी मां  ।
उसके सपनों के लिए हमेशा पढता है कुछ बनना चाहता है कि
 मैं उसके सपनों के  मंजिलों को छू सकूं
एक मां है जो हर दुख को  सहकर  अपने हर वादे तोड़ कर
 बच्चों के वादे पूरा करती है उसे मिलता है सुकून इसमें
 पग पग   चलती है धूप में कभी बरसात कभी गर्मी सब सहती है मां
एक बच्चों के सपनों के लिए सिर्फ एक बच्चों के सपनों के लिए।

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