गजल/ आप मुझ पर बस इतना ही एहसान कीजिए

 आप मुझ  पर बस इतना ही एहसान कीजिए। 

मुझसे जब भी नजर मिलाइए गुमान कीजिए।।


आपसे ज्यादा खूबसूरत जहां में खुदा भी नहीं।

खुदा से मिलकर इस बात का ऐलान कीजिए।।


मैं आपके दुश्मनों या दोस्तों  में हूं मालूम नहीं।

जरा करीब आइए और मेरी पहचान कीजिए।।


ख्वाबों में आकर मुझे रात भर जगाना छोड़िए।

इस तरह से मुझे रोज-रोज न परेशान कीजिए।।


आपकी याद में आहिस्ता-आहिस्ता मर रहा हूं।

साथ मिलकर मौत को थोड़ा आसान कीजिए।।


  ------------- Ravi Singh Bharati -------------

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