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एकांत भी बहुत कुछ भी दे सकता है /

  एकांत भी बहुत कुछ दे सकता है / रवि सिंह भारती अपने भीतर के एकांत को साधे बिना इनसान , समाज के लिए कुछ नहीं कर सकता । भीतर से बाहर की यात्रा और बाहर से भीतर की यात्रा जीवन का एक चक्र है । इसके बिना मानव की मुक्ति नहीं । एकांत साधना साधक को ' स्व ' से ऊपर उठाकर ' पर ' से जोड़ती है और हमारे भीतर के भय को दूर करती है। एकांत कभी अभिशाप नहीं बन सकता है , बल्कि इसका वह उपयोग कर लेता है अपनी चेतना की गहराइयों में उतरने के लिए । संसार में ऐसा होता है कि हम दूसरों के साथ रहते - रहते आत्म - विस्मरण में खो जाते हैं , हमें आत्म - अनुभव नहीं हो पाता है और न ही हमें अपने व्यक्तित्व की मौलिकता का एहसास हो पाता है।हम समाज की सारी अपेक्षाओं को पूरा करते हुए एक झूठा व्यक्तित्व निर्मित कर लेते हैं , इसलिए यह कहा जा सकता है कि हम जिसे अपना व्यक्तित्व समझते हैं , वह दरअसल समाज का दिया हुआ व्यक्तित्व होता है । हम अच्छे हैं , बुरे हैं , सुंदर हैं , करुण हैं , नैतिक हैं , अनैतिक हैं , जो कुछ भी हैं , उसका निर्णय समाज की मान्यताओं और धारणाओं पर निर्भर करता है । यही हमारी मूल व्यथा है।हम हैं , ...

मां का प्यार

ढूंढता है एक बच्चे अपनी मां को किसी पेड़ की छांव में  किसी बड़े घरों में मजदूरी करती है उसकी मां  खिलाती पिलाती है बड़ा करती है बहुत मेहनत से उसकी मां  । उसके सपनों के लिए हमेशा पढता है कुछ बनना चाहता है कि  मैं उसके सपनों के  मंजिलों को छू सकूं एक मां है जो हर दुख को  सहकर  अपने हर वादे तोड़ कर  बच्चों के वादे पूरा करती है उसे मिलता है सुकून इसमें  पग पग   चलती है धूप में कभी बरसात कभी गर्मी सब सहती है मां एक बच्चों के सपनों के लिए सिर्फ एक बच्चों के सपनों के लिए।
आज शाम को जाते जाते उसने कह दिया था कि तुम बहुत याद आओगे तुम्हारे साथ जितनी पल मैंने गुजारी वह एक पल था मुझे जब तुम जब पहली बार कॉलेज में मिली थी ऐसा मुस्कुराती की दिखाई देती थी मैंने एक बार बहुत हिम्मत करके आपसे पूछा था कि आपके मुस्कुराने का राज क्या है और आपने फिर वही मुस्कान भरी लफ्जों में बताया था मुस्कुराना होता है तो किसी के पीछे मत भागो अपने खुद के पीछे भागो हमेशा मुस्कुराते रहोगे उस दिन मुझे मैं बस यही सोचता रहा क्या सच में किसी के पीछे नहीं भागने पर हमेशा मुस्कान लिए लोग रहते हैं लेकिन मेरे दोस्त तो कितने खुश रहते हैं किसी और के पीछे भागते भागते ...... रवि सिंह भारती...........